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यहां रामलीला में लड़की निभा रही है राम का पात्र, अभिनय देखकर रह जाएंगे दंग


दिव्या पाटनी का कहना है कि वह पिछले तीन सालों से रामलीला में अभिनय कर रही हैं.

दिव्या पाटनी का कहना है कि वह पिछले तीन सालों से रामलीला में अभिनय कर रही हैं.

Dussehra 2020: कर्नाटकखोला (Karnataka Khola) के रामलीला के आयोजक बिट्टू कर्नाटक का कहना है कि सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा (Almora Ram Leela) की रामलीला पहचान है. कोरोना काल में किसी भी स्थान पर रामलीला नहीं हो रही है.

अल्मोड़ा. सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा (Almora) में रामलीला का इतिहास 100 साल से भी अधिक पुराना है. नगर में पहले बद्रेश्वर (Badreshwar) में ही रामलीला होती थी. फिर नन्दादेवी सहित दर्जन भर स्थानों पर रामलीला का आयोजन नवरात्रों (Dussehra 2020) में होने लगा. जब नगर में बिजली नहीं थी तब लकड़ी के छिलकों से रामलीला का मंचन होता था. लेकिन समय के साथ-साथ रामलीला (Ram Leela) के मंचन में कई परिवर्तन भी आए हैं.

इस बार कोरोना संक्रमण (COVID-19) से सब कुछ बदल गया है. सिर्फ कर्नाटकखोला में रामलीला हो रही है. खास बात यह है कि लोग रामलीला का वर्चुअल माध्यम से आनन्द ले रहे हैं. जिला प्रशासन ने भी भीड़ कम हो इसके लिए कम ही संख्या में लोगों के शामिल होने की अनुमति दी है.

अल्मोड़ा की पहचान रामलीला
कर्नाटकखोला के रामलीला के आयोजक बिट्टू कर्नाटक का कहना है कि सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा की रामलीला पहचान है. कोरोना काल में किसी भी स्थान पर रामलीला नहीं हो रही है. लेकिन हमारी रामलीला कमेटी ने रामलीला करने की ठानी थी. दर्शकों को रामलीला वर्चुवल माध्यम से दिखाई जा रही है. कोरोना काल में भी कलाकारों में जोश की कमी नहीं है. एक माह की तालीम करने के बाद कलाकार खुद गायन के साथ ही रामलीला का मंचन भी कर रहे हैं. वहीं, कोरोना काल में भी कलाकारों ने रामलीला की तालीम लेने में किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ी. पिछले तीन सालों से कर रहीं अभिनय
दिव्या पाटनी का कहना है कि वह पिछले तीन सालों से रामलीला में अभिनय कर रही हैं. पहले सीता बनती थी, पर इस बार वह राम की भूमिका निभा रही हैं. एक माह तक रोजाना तालीम लेकर रामलीला में शिरकत करती रही हैं. चौपाई, दोहा और श्लोक सहित सभी तरह के राग-रागिनी उन्कें द्वारा गाई जाती हैं. वह राम के पात्र में अपनी भूमिका निभा रही हैं. अल्मोड़ा की रामलीला को देखने के लिए एक समय में दूर-दूर गांव से लोग पहुंचते थे. समय बदलने के साथ ही रामलीला के मंचन में बदलाव आये लेकिन लोगों की श्रद्धा में कही कमी नहीं आई. कोरोना संक्रमण काल में भी रामलीला का मंचन किया जाना श्रद्धा और विश्वास को बढ़ाता है.





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Sanjay Biswashttp://www.ipageexpert.com
A Professional Blogger, Website Designer and Developer. By Education, a Software Engineer. Sanjay Completed his B.Tech in 2014 form Uttarakhand Technical University.

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